Tuesday, May 12, 2009

सवेरा

होत सवेरा सूरज उगता
अँधेरा हो जाता दूर ।
चिडिया चहक -चहक कर जाती
दाना चुगने कोंसो दूर ।
सूरज की किरणे पड़ने पर
जल में खिलते कमल के फूल ।
भोंरे फूलो के रस को ले कर
उड़ जाते मस्त गगन में दूर ।
फूलों की कलियों पर जाकर
लेती मस्त सुगंदित मकरंद को चूस ।
पवन फूलों के इस सुगंध को
विखेरता मस्त अम्बर में दूर सुदूर ।
हिम के आँचल से निकल कर
नदियाँ बहती जाती दूर सुदूर ।
झरनोंके झर झर गुंजन से
तन मन जाए सिहर सिहर ।
जीवन के इस कोमल पथ पर
बदते जाओ बीर तुम दूर ।

1 comment:

  1. bahut acchi kavita hai lekin thoda aur prayas kren

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