Monday, December 14, 2009

वो बात मुझे याद है

सरकस की वो रात याद है
जिने पर की वो बात याद है ।
साये तले नीले आसमा के
वो तेरी पहली मुलाकात याद है ।
जब आए थे तुम मेरे शहर में
अनजान थे इन गलियों से
तब एक साथी की तलाश थी तुम्हे
मुझे वो तुम्हारी मुलाकात याद है ।
जीने के लिए दो वक्त की रोटी
की दरकार थी तुम्हे
तब रोते हुए तेरे मासूम आँखों की
वो बात मुझे याद है ।
जो चाहते थे किसी को अपना बनाना
तेरी आँखों की वो चाहत मुझे याद है
सरकस की वो बात मुझे याद है ।
तेरे ऊपर थी दुनिया की नजर
लेकिन तेरी नजरो की सरारत मुझे याद है ।
तू तो थी एकदम मासूम लेकिन
इन गलियों में तेरी बेवसी को
लुटते देखना मुझे याद है ।..................

9 comments:

  1. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

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  2. Sundar rachnake saath aapka aagman hua hai..swagat hai!

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  3. अच्छी रचना। बधाई। ब्लॉगजगत में स्वागत।

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  4. Is masoom rachnakee har panktee sundar hai!

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  5. बहुत सुंदर रचना है। ब्लाग जगत में द्वीपांतर परिवार आपका स्वागत करता है।

    pls visit...
    http://dweepanter.blogspot.com

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  6. प्रशंसनीय प्रस्तुति

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